Sayyid Akhtar Hussein Rizvi
Kaifi Azmi
( 1919 - 2002 )

Sayyid Akhtar Hussein Rizvi, known as Kaifi Azmi (Hindi: कैफ़ी आज़मी) was an Indian Urdu poet. He will always be remembered who brought Urdu literature to Indian motion pictures. Together with Pirzada Qasim, Jon Elia and others he participated in the most memorable mushairas of the twentieth century. More

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद...

एक गर्दन पे सैकड़ों चेहरे और हर चेहरे पर हज़ारों दाग़ और हर दाग़ बंद दरवाज़ा रौशनी इन से आ नहीं सकती...

ये बरसात ये मौसम-ए-शादमानी ख़स-ओ-ख़ार पर फट पड़ी है जवानी भड़कता है रह रह के सोज़-ए-मोहब्बत झमाझम बरसता है पुर-शोर पानी...

लो पौ फटी वो छुप गई तारों की अंजुमन लो जाम-ए-महर से वो छलकने लगी किरन खिचने लगा निगाह में फ़ितरत का बाँकपन जल्वे ज़मीं पे बरसे ज़मीं बन गई दुल्हन...

रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ बार-हा तोड़ चुका हूँ जिन को उन्हीं दीवारों से टकराता हूँ...

एक दो ही नहीं छब्बीस दिए एक इक कर के जलाए मैं ने एक दिया नाम का आज़ादी के उस ने जलते हुए होंटों से कहा...

अब तुम आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी आया न करो मुझ से बिखरे हुए गेसू नहीं देखे जाते सुर्ख़ आँखों की क़सम काँपती पलकों की क़सम थरथराते हुए आँसू नहीं देखे जाते...

राम बन-बास से जब लौट के घर में आए याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए रक़्स-ए-दीवानगी आँगन में जो देखा होगा छे दिसम्बर को श्री राम ने सोचा होगा...

तुम ख़ुदा हो ख़ुदा के बेटे हो या फ़क़त अम्न के पयम्बर हो या किसी का हसीं तख़य्युल हो...

जब भी चूम लेता हूँ उन हसीन आँखों को सौ चराग़ अँधेरे में झिलमिलाने लगते हैं ख़ुश्क ख़ुश्क होंटों में जैसे दिल खिंच आता है दिल में कितने आईने थरथराने लगते हैं...