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आँख ने देखा पर वाणी ने बखाना नहीं। भावना ने छुआ पर मन ने पहचाना नहीं। राह मैनें बहुत दिन देखी, तुम उस पर से आए भी, गए भी, --कदाचित, कई बार-- पर हुआ घर आना नहीं।
अज्ञेय
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