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तैरता हुआ चांद मछलियों के जाल में नहीं फँसता जब सारा पानी जमकर हो जाता है बर्फ़ वह चुपके से बाहर खिसक लेता है जब झील सूख जाती है तब उसकी तलहटी में वह फैलाता है अपनी चांदनी ताकि रातों को भी दिखाई दे मछलियों का तड़पना।
नरेश सक्सेना
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