Poets
Poetry
Books
Log in
Poets
Poetry
Books
जला है जीवन यह आतप में दीर्घकाल; सूखी भूमि, सूखे तरु, सूखे सिक्त आलबाल; बन्द हुआ गुंज, धूलि-- धूसर हो गये कुंज, किन्तु पड़ी व्योम उर बन्धु, नील-मेघ-माल।
Nirala
Cancel
Log in