Poets
Poetry
Books
Log in
Poets
Poetry
Books
मत दबा समय की चट्टानों के नीचे, दोनों हाथों तेरी मूरत को खींचे, चरणों को धोते, आधे से दृग मींचे, मैं पड़ा रहूँगा तरु-छाया के नीचे, स्वागत, जग चाहे कितना कीच उलीचे। मत दबा समय की चट्टानों के नीचे।
Makhanlal Chaturvedi
Cancel
Log in