Waseem Barelvi
( 1940 )

Waseem Barelvi (Hindi: वसीम बरेलवी) is an Indian Urdu poet. His ghazals are very popular. He has been awarded the "Firak International Award". More

तुम आ गए हो तो कुछ चाँदनी सी बातें हों ज़मीं पे चाँद कहाँ रोज़ रोज़ उतरता है...

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग जारी है उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है...

अपने अंदाज़ का अकेला था इस लिए मैं बड़ा अकेला था प्यार तो जन्म का अकेला था क्या मिरा तजरबा अकेला था...

मैं तुम से छूट रहा हूँ मिरे प्यारो मगर मिरा रिश्ता पुख़्ता हो रहा है इस ज़मीं से जिस की गोद में समाने के लिए मैं ने पूरी ज़िंदगी रीहरसल की है...

तिरे ख़याल के हाथों कुछ ऐसा बिखरा हूँ कि जैसे बच्चा किताबें इधर उधर कर दे...

बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी...

जिस्म की चाह लकीरों से अदा करता है ख़ाक समझेगा मुसव्विर तिरी अंगड़ाई को...

आते आते मिरा नाम सा रह गया उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया रात मुजरिम थी दामन बचा ले गई दिन गवाहों की सफ़ में खड़ा रह गया...

वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता मगर इन एहतियातों से तअल्लुक़ मर नहीं जाता...

शहर मेरा उदास गंगा सा कोई भी आए और अपने पाप खो के जाता है धोके जाता है आग का खेल खेलने वाले...