असाधारण
तापित को स्निग्ध करे, प्यासे को चैन दे; सूखे हुए अधरों को फिर से जो बैन दे ऐसा सभी पानी है। लहरों के आने पर, काई-सा फटे नहीं; रोटी के लालच मे तोते-सा रटे नहीं प्राणी वही प्राणी है। लँगड़े को पाँव और लूले को हाथ दे, सत की संभार में मरने तक साथ दे, बोले तो हमेशा सच, सच से हटे नहीं; झूट के डराए से हरगिज डरे नहीं सचमुच वही सच्चा है। माथे को फूल जैसा अपने को चढ़ा दे जो; रूकती-सी दुनिया को आगे बढा दे जो; मरना वही अच्छा है। प्राणी का वैसे और दुनिया मे टोटा नहीं, कोई प्राणी बड़ा नहीं कोई प्राणी छोटा नहीं।

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