है वहाँ शान-ए-तग़ाफ़ुल को जफ़ा से भी गुरेज़
है वहाँ शान-ए-तग़ाफ़ुल को जफ़ा से भी गुरेज़ इल्तिफ़ात-ए-निगह-ए-यार कहाँ से लाऊँ

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