बौछार
इतनी तेज़ी से आयी थी रुक ही न सकी वह उसी झोंक में चली गयी धीमे आती सहलाती हम कहते यह बौछार प्यार की है रहते निःस्तब्ध। छुअन से बँधे। किन्तु वह रुकी नहीं हम सहमे, थमे, उफ़न-उमड़न मन की पर एक उमस में छली गयी वह आयी आँचल लहराती तृषा और लहराती तृषा और गहराती भरमाती, सिहराती, चली गयी।

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