पुनराविष्कार
कुछ नहीं, यहाँ भी अन्धकार ही है, काम-रूपिणी वासना का विकार ही है। यह गुँथीला व्योमग्रासी धुआँ जैसा आततायी दृप्त-दुर्दम प्यार ही है।

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