गिरजे से घंटे की टन-टन
गिरजे से घंटे की टन-टन! मंदिर से शंखों की तानें, मस्जिद से पाबंद अजानें उठ कर नित्य किया करती हैं अपने भक्तों का आवाहन! गिरजे से घंटे की टन-टन! मेरा मंदिर था, प्रतिमा थी, मन में पूजा की महिमा थी, किंतु निरभ्र गगन से गिरकर वज्र गया कर सबका खंडन! गिरजे से घंटे की टन-टन! जब ये पावन ध्वनियाँ आतीं, शीश झुकाने दुनिया जाती, अपने से पूछा करता मैं, करूँ कहाँ मैं किसका पूजन! गिरजे से घंटे की टन-टन!

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